शहरी भारत का 60 फीसदी से अधिक गंदा पानी बिना शोधन के जलाशयों में प्रवेश करता है: एनजीटी
| Agency - 06 Feb 2019

नई दिल्ली, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि शहरी भारत में पैदा होने वाले गंदे पानी का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा साफ किये बिना नदी जैसे जलाशयों में प्रवेश करता है जिससे प्रदूषण होता है तथा यह मनुष्य के इस्तेमाल करने के लिये अनुपयुक्त बनाता है। हरित अधिकरण ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि पर्यावरण मानदंडों का पालन संतोषजनक नहीं है, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर मौत और बीमारी होती है और वायु, जल एवं धरती को गंभीर क्षति पहुंचती है। अधिकरण ने यह टिप्पणी सोमवार को वी मणिकम की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में उद्योगों के अपशिष्ट जल और नगर निकायों द्वारा दूषित जल छोड़े जाने से तिरुमणिमुथर नदी प्रदूषित हो गयी। अधिकरण ने सलेम नगर निगम को निर्देश दिया कि वह पर्यावरण को हुई क्षति की भरपाई के लिये एक महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास 25 लाख रुपये जमा कराए। नदी की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिये अधिकरण ने सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों के एक दल को संयुक्त रूप से निरीक्षण करने का निर्देश दिया और एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा।
 


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