शीला दीक्षित के बयान से साबित हुआ की पर्दे के पीछे भाजपा और कांग्रेस में मिलीभगत: गोपाल राय
| Agency - 16 Mar 2019

नई दिल्ली,  शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली प्रदेश संयोजक एवं कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने कहा कि, कांग्रेस की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित द्वारा एक न्यूज चैनल को दिए गए बयान में मोदी की तारीफ करना इस बात को साबित करता है कि परदे के पीछे कहीं ना कहीं यह दोनों पार्टियां एक ही हैं। जिस प्रकार से शीला दीक्षित ने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नरेंद्र मोदी ज्यादा बेहतर हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर एक तबका ऐसा भी है, जो अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को चुनाव जिताने के समर्थन में है।

शीला दीक्षित के इस बयान के बाद दिल्ली के गलियारों में एक चर्चा होने लगी है, कि कहीं शीला दीक्षित कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद लोकसभा चुनाव लड़ने के बजाय अब दोबारा से राज्यपाल बनने की तैयारी तो नहीं कर रही हैं। क्योंकि ऐसे समय में जब पूरा देश मोदी और शाह की तानाशाही के खिलाफ एकजुट हो रहा है, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित का यह बयान उनकी मंशा पर सवालिया प्रश्नचिन्ह लगाता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के बयान पर पलटवार करते हुए गोपाल राय ने कहा कि, मनोज तिवारी के मुताबिक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2014 में रेल भवन के सामने धरना प्रदर्शन किया था। मीडिया के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी से प्रश्न पूछते हुए उन्होंने कहा, कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनवरी के महीने में धरना प्रदर्शन किया था, और 2014 में लोकसभा चुनाव अप्रैल में हुआ था, तो किस आधार पर मुख्यमंत्री केजरीवाल के धरने के बाद भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था?

मनोज तिवारी के एक और बयान कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से इनकार किया, पर पलटवार करते हुए गोपाल राय ने कहा, कि ना तो भाजपा ने और ना ही किसी अन्य पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के अंदर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए अपील लगाई, तो फिर सुप्रीम कोर्ट ने किस की अपील पर अपना फैसला सुनाया है, और कब फैसला सुनाया है, इसका जवाब दे भाजपा?

मनोज तिवारी पर कटाक्ष करते हुए गोपाल राय ने कहा, कि अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना संवैधानिक ही नहीं है, तो पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना को शायद एबीसीडी भी नहीं आती थी, साहिब सिंह वर्मा को शायद राजनीति का शून्य ज्ञान था, जो उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात कही थी। अगर यह असंवैधानिक है तो उप प्रधानमंत्री रहते हुए किस आधार पर लालकृष्ण आडवाणी ने संसद में संशोधन के लिए विधेयक प्रस्तुत किया था, मनोज तिवारी दिल्ली की जनता को बताएं?

दिल्ली की जनता स्पष्ट रूप से जानती है, कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का रास्ता लोकसभा से ही निकल सकता है। लोकसभा में एक संशोधन विधायक प्रस्ताव लाकर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सकता है। 2014 में दिल्ली की जनता ने भाजपा को 7 विधायक जीता कर इसीलिए दिए थे, कि वह दिल्ली की जनता को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाए। परंतु भाजपा ने दिल्ली की जनता के साथ धोखा किया, अपना वादा पूरा नहीं किया, और अब अपनी नाकामी और अपने धोखे को छुपाने के लिए कभी मुख्यमंत्री केजरीवाल के धरने का बहाना बनाते हैं, तो कभी सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर बहाना बना रहे हैं।

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए इस बार जनता आम आदमी पार्टी के 7 प्रत्याशियों को जिता कर लोकसभा में भेजेगी। लोकसभा में गठबंधन की सरकार बनेगी। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे, और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाएंगे।


Browse By Tags



अन्य बड़ी ख़बरें इन्ही विषयों पर..